नशे का त्याग कर जीवन को सफल बनाये - ऋषभविजय म. सा.

भीनमाल, 15 दिसम्बरः जैन मुनि ज्योतिष सम्राट ऋषभचंद्र विजय म. सा. ने निकटवर्ती ग्राम निम्बावास में हजारो ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि पहला सुख निरोगी काया को सार्थक करने के लिए नशे का त्याग करना बहूत जरुरी है। उन्होने उदाहरण देते हुए समझाया कि घर में माया होने पर भी अगर निरोगी काया नहीं है तो उसका भोग नही कर सकते है। मनुष्य जीवन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभता से मिलता है। देवता भी मनुष्य जीवन को प्राप्त करने के लिए लालायित रहते है। इसलिए हमें मनुष्य जीवन को मात्र नशे की लत के कारण व्यर्थ नही गवाना चाहिए। मनुष्य जीवन में धर्म के सत्संग से ही जीवन को सुधारा जा सकता है। सबकी जन्म की तारीख निश्चित है परन्तु मृत्यू की तारीख निश्चित नही है।

 

जैन मुनि ने जैन धर्म का जिक्र करते हुए कहा कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकरो में से अधिकांश क्षत्रिय थे परन्तू उन्होने नशे का त्याग कर धर्म एवं समाज की रक्षा का कार्य किया। धर्म क्रिया बिना नशे के ही हो सकती है। धर्म के सहारे ही मनुष्य आगे बढ सकता है। हमें तारो की तरह वरन सूर्य की तरह चमकना होगा, तभी हम समाज को नई रोशनी दे सकते है। समाज में व्याप्त कृत्यो का त्याग कर आगे बढने की प्रेरणा देते हूए उन्होने समाज सुधार का आव्हान किया।