श्री लक्ष्मी वल्लभ पाश्र्वनाथ 72 जिनालय महातीर्थ भीनमाल2

भीनमाल: श्री लक्ष्मी वल्लभ पाश्र्वनाथ 72 जिनालय महातीर्थ भीनमाल की अंजनशलाका प्राण प्रतिष्ठा समारोह को यादगार बनाने हेतु युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरु कर दी गई है। भीनमाल के लुंकड परिवार ने अकेले इस तीर्थ निर्माण का बीडा उठाया तथा करीब 100 एकड़ ज़मीन पर इस तीर्थ को विकसित कर 72 जिनालय का निर्माण कराया।

 

परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य देव श्री हेमेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के आशीर्वाद से एवं श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक मुनिप्रवर श्री ऋषभचन्द्रविजयजी म.सा. की पावन प्रेरणा एवं दानवीर श्रेष्ठीवर्य संघवी शाह सुमेरमलजी, किशोरमलजी तथा माणकचन्दजी लुंकड परिवार द्वारा निर्मित 72 जिनालय की प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश के श्री संघों एवं श्रद्वालुओं में चर्चा है कि यह प्रतिष्ठा कैसी होगी ? सन् 1991 में मुनिप्रवर ने तीर्थ की प्रेरणा की थी, सन् 1996 में शिलान्यास के साथ मुनिराज श्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा. की दीक्षा हुई थी। आगामी 14 फरवरी 2011 को भव्य अंजनशलाका प्राण प्रतिष्ठा 11 दिवसीय महोत्सव 4 फरवरी से 15 फरवरी तक होगा। आओ इसकी एक झलक हम आपको बता रहे है।

 

इस समारोह में अनेक आचार्य भगवंत सहित चार सौ से पांच सौ साधु साध्वी भंगवन्तो कें पधारने की संभावना है। 12 हजार लोगो के बैढने का ओपन स्टेडियम, 100 ग् 50 का रात्रि भक्ति के लिए विशाल स्टेज, आवास, भोजन, एवं पांर्किग की सुन्दर व्यवस्था, अंजनशलाका, मण्डप, सम्मेत शिखर तीर्थ की विशाल रचना, मेरु पर्वत तथा परमात्मा का विशाल समोसरण, विदेशी तर्ज पर लेजर शो, वाॅटर शो तथा पानी के फव्वारों में भगवान के चित्र, भव्य गेट, बंगाली लाईटें, 11 लाख फूलों से मंदिर की सजावट, विभिन्न तपस्या एकासना, बियासना, आयम्बिल सहित सभी तप की आराधना के लिए अलग व्यवस्था, वी.आई.पी. तथा वी.वी.आई.पी. के लिए सम्पूर्ण आधुनिक सुविधा, स्पेशल दो हेलीपेड़, प्रतिदिन हैलीकाप्टर से पुष्प वर्षा, सम्पूर्ण भीनमाल शहर में माइक से प्रसारण व्यवस्था, प्रतिदिन आर्कषक रंगोली प्रख्यात बेेैण्ड, देश के प्रख्यात गायक एवं कलाकारों द्वारा प्रस्तुति पाश्र्वनाथ भगवान के भवों की एवं जैन विज्ञान की प्रदर्शनी, 1000 रत्नों की मूर्तियों के भव्य दर्शन, महापुरुषों का जीवन दर्शन, नवकार महिमा, साधु, साध्वीयों का वर्णन, प्रतिदिन भव्य रथयात्रा में हाथी, घोड़े, रथ, बैण्ड, ढ़ोल सहित अपार जन समूह, उडिसा का नृत्य शंखवादक शहनाई, आदीवासी कला, एवं राजस्थानी कला नृत्य हेमामालिनी का पद्मावती नृत्य सहित कई राजनैतिक हस्तियां, बाॅलीवुड, हाॅलीवुड, के कलाकार अपनी कला को अंजाम देगें।